Source: ਰਾਇ, ਦੇਵ ਅਤੇ ਗੁਰਦੇਵ (ਗੁਰਮਤਿ ਵਾਲੇ)

राइ, देव अते गुरदेव (गुरमति वाले)

गुरबाणी विच राइ ते देव दी वरतो वेख के कई अखौती विदवान नासमझी विच देव अते राइ बारे टिपणीआं करदे हन के गुरमति ने तां देवी देवते रद कीते हन फेर इहनां स़बदां दी वरतो केवल भट साहिबान दी भावना कारण वरते गए हन जां सनातन मति तों आउण कारण भट साहिबान ने ही वरते हन। देवी देवतिआं बारे असीं पहिलां वी विचार कर चुके हां "आदि अते दसम बाणी विच देवी देवतिआं दी अते मूरती पूजा है? पर अज इक होर पख विचारांगे।

राइ वरतिआ जांदा सी राजे लई , मुखी लई। दसम ग्रंथ अते आदि गथ विच राइ दी वरतो होई है। "धरम राइ नो हुकमु है बहि सचा धरमु बीचारि ॥, "असू सुखी वसंदीआ जिना मइआ हरि राइ ॥। "गुणदाता हरि राइ है हम अवगणिआरे ॥। "तिन बेदीअन की कुल बिखै प्रगटे नानक राइ॥ सभ सिखन को सुख दए जह तह भए सहाइ॥

सारे भगत जन, गुरू साहिबान, भट साहिबान, खालसा। सारे ही राइ हन। अबिनासी राज दे राजे। जिस दिन गुरमति समझ लगण लग जावेगी, सारे ही राइ (राजे) ही दिसणगे। देव (देण वाले) ही दिसणगे। असल निराकारी राज अबिनासी राज वाले राजे, देवते। ना के संसारी तमगे ते उपाधी। निरपख हो के निरवैर हो के गुरमति विचार करन नाल अबिनासी राज दा पता लगदा है। अबिनासी राज बारे विचार पड़्हन लई वेखो "अभिनासी राज ते दुनिआवी राज

"गुर जैसा नाही को देव दी वरतो करके इक दसम विरोधी वीर ने कहिआ के गुरमति ने देव रद कर दिते हन। जे मैं कहा मेरे पिता वरगा होर कोई पिओ नहीं है तां सारे बाकी पिओ रद हो जादे हन? इस पंकती विच वी इही कहिआ जा रहिआ है के गुर दे बराबर होर कोई देव (देण वाला) नहीं है। किउं – किउंके गुर ता गुणां दा दाता हे।

गुर ही देव है (देण वाला) है इह तां बिलकुल सही है। जिस कोल जो हुंदा है उही उह दिंदा है। कबीर कोल जिहड़ी बसत सी उसनी संसार नूं दिती। "कोठरे महि कोठरी परम कोठी बीचारि॥ गुरि दीनी बसतु कबीर कउ लेवहु बसतु सम॑ारि॥४॥ कबीरि दीई संसार कउ लीनी जिसु मसतकि भागु॥ अंम्रित रसु जिनि पाइआ थिरु ता का सोहागु॥"। गुरू नानक देव कोल नाम सी, नानक नाम दे रहिआ है गुरबाणी राहीं।

देव तों भाव हुंदा हे देण वाला। जो किसे नूं कुझ देवे। जो जिस कोल हुंदा है उही उह दूजे नूं दे सकदा है। जिवें सूरज कोल तपस़ है, रोस़नी है। इस ते संसार नूं उह जदों ऊरजा दिंदा है ता भोले भाए लोक उसनूं सूरज देव कहि दिंदे हन। इदां ही जदों धरती फल आहार देवे तां धरती देवी है। जदों मां बचे नूं जीवन देवे तां मां देवी है। सारे संसार विच लोक स़ुकराने वजों देण वाके नूं देव आख दिंदे हन।

गुरमति ने देव देवी मंने हन पर मूरती बणा के पूजण नूं मना कीता है। अकाल दा नीअम है के उसने देण वाके (देव) साजे हन जो संसार दी कार सांभदे हन। सूरज नूं सूरज विच अकाल आप वरत के ऊरजा दिंदा है। देण वाले ने वी देणा अकाल दे हुकम विच ही है ते लैण वाले ने वी अकाल दे हुकम विच ही लैणा है पर जे सूरज दी मूरती बणा के कोरी पूजे तां उस मूरती ने ऊरजा जां रोस़नी नहीं देणी। इही गल आखी है "माटी के करि देवी देवा तिसु आगै जीउ देही॥ ऐसे पितर तुमारे कहीअहि आपन कहिआ न लेही॥। जदों कहिआ के माटी दे देवी देवता कुझ नहीं दे सकदे इह ठीक है। पर देव किसनूं मंनिआ इह वी पड़्हना ज़रूरी है। इह पख विचारन जोग है। वेखदे हां

"माणस ते देवते भए धिआइआ नामु हरे॥ – भगत जन जदों नाम धिआ के नाम प्रापत कर दूजिआं नूं अगिआनता दे हनेरे तों चानण वल लैके जाण तां उह माणस तों देवते हो जादे हन। नाम दूजे नूं वी दिंदे हन। जिवें कबीर जी आखदे हन "गुरि दीनी बसतु कबीर कउ लेवहु बसतु सम॑ारि॥४॥ कबीरि दीई संसार कउ लीनी जिसु मसतकि भागु॥

"बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार॥ जिनि माणस ते देवते कीए करत न लागी वार॥(म १, रागु आसा, ४६२) – भाव आपणे गुर (गुण) नूं बलिहार जांदा हां जिसनूं माणस तों देवते बणाउण नूं समां नहीं लगिआ

इसदा उदाहरण गु्रू अरजुन देव साहिब जी पातिस़ाह महाराज दे रहे हन "तुसि नानकु देवै जिसु नामु तिनि हरि रंगु मणिआ ॥७॥(रागु गउड़ी, ३१९) – तां ही पंचम पातिस़ाह नानक पातिस़ाह नूं देव आख रहे हन "कबीरि धिआइओ एक रंग॥ नामदेव हरि जीउ बसहि संगि॥ रविदास धिआए प्रभ अनूप॥ गुर नानक देव गोविंद रूप॥(रागु बसंत, म ५, ११९२) अते "बरनि न साकउ एक टुलेरै॥ दरसन पिआस बहुतु मनि मेरै॥ मिलु नानक देव जगत गुर केरै॥(म ५, रागु कानड़ा, १३०४)

"महा मुगध ते कीआ गिआनी॥ गुर पूरे की अकथ कहानी॥ पारब्रहम नानक गुरदेव॥ वडै भागि पाईऐ हरि सेव॥

"क क्रिस्नं त सरब देवा देव देवा त आतमह॥ आतमं स्री बास्वदेवसॵ जे कोई जानसि भेव॥ नानक ता को दासु है सोई निरंजन देव॥(म ९, रागु जैजावंती, १३५३

जिसनूं गिआन गुरू, भगत, भट साहिबान, गुरू पातिस़ाह देवते नहीं दिसे, देण वाले नहीं दिसे उह, देण वाले तों कुझ गिआन लै वी नहीं सकदा।

भट साहिबान ने गुरू अरजुन देव नूं देवता मंन लिआ "जब लउ नही भाग लिलार उदै तब लउ भ्रमते फिरते बहु धायउ॥ कलि घोर समुद्र मै बूडत थे कबहू मिटि है नही रे पछुतायउ॥ ततु बिचारु यहै मथुरा जग तारन कउ अवतारु बनायउ॥ जपॵउ जिन॑ अरजुन देव गुरू फिरि संकट जोनि गरभ न आयउ॥६॥ उहनां तों गिआन लैके आप माणस तों देवते हो गए ते गुरू ग्रंथ साहिब विच रहिंदी दुनीआं तक सथान प्रापत कर गए।

गुरदेव तों भाव है गुण देण वाला। जिस तों वी गुरमति गिआन, गुणां दा गिआन मिल रहिआ है उह गुरदेव है, गुण देण वाला। गुरदेव बारे बेअंत उदाहरण हन गुरमति विच। गुरमति नूं निरपख निरवैर हो के पड़्हीए तां गुण लै सकदे हां। जे मन विच दवेस़ दी भावना है, हरेक लिखत पड़्हत विच वैर, विरोध, दवेस़ दी भावना होवेगी? सनातन मति जां इसलाम मति नाल बैर होवेगा तां गुरमति दी गल वी समझ नहीं लगणी। पर जे इह पता होवे के केवल अगिआनता कारन लोक हरेक धरम विच चंगे माड़े हो सकदे हन तां गुणां दी सांझ करन दी इछा जागेगी। गुरमति कटदी नहीं समझाउण दा कंम करदी है। प्रेम भावना नाल निरमल (मल ॲहित) मन नाल गुरमति नूं विचारो तां इसदा भाव मन विच वस जाणा। जिस ने प्रेम कीता प्रभ उसनूं ही मिलणा। जिसदे मन विच विकार होण उह विदवान तां हो सकदा है गुरमुख (गुणां नूं मुख रखण वाला) नहीं हो सकदा।


Source: ਰਾਇ, ਦੇਵ ਅਤੇ ਗੁਰਦੇਵ (ਗੁਰਮਤਿ ਵਾਲੇ)